मंडला | 5 जनवरी 2026

शीतलहर का बढ़ता प्रभाव

हर वर्ष दिसंबर–जनवरी के दौरान शीतलहर का असर देखने को मिलता है, जो कई बार नवंबर से फरवरी तक भी बना रहता है। मौसम विज्ञान संगठनों के अनुसार वैश्विक तापमान में हो रहे बदलावों के कारण मौसम में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि, पशुधन और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। वर्तमान में शीत ऋतु के दौरान शीतलहर से अनेक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका रहती है।
स्वास्थ्य समस्याओं से सतर्क रहने की अपील
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहंती ने बताया कि शीतलहर से होने वाली समस्याओं से बचाव कर इस मौसम का सुरक्षित सामना किया जा सकता है। जब ठंडी हवाएं तेज़ी से चलने लगती हैं और तापमान में अचानक गिरावट आती है, तो इसे शीतलहर कहा जाता है। सामान्यतः जब न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से गिरकर 4–5 डिग्री या उससे नीचे चला जाता है, तब शीतलहर की स्थिति बनती है।
मौसम की जानकारी पर रखें नजर

स्थानीय मौसम पूर्वानुमान की जानकारी के लिए रेडियो, टीवी और समाचार पत्रों जैसे सभी माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं का नियमित रूप से पालन करने की सलाह दी गई है, ताकि समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाई जा सकें।
शीतलहर से बचने के आवश्यक उपाय
शीतलहर के दौरान पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े पहनना बेहद जरूरी है। दस्ताने, टोपी, मफलर और जूते का उपयोग करें। बहुत चुस्त कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि इससे रक्त संचार प्रभावित होता है। हल्के, ढीले-ढाले और सूती कपड़े बाहर की ओर तथा ऊनी कपड़े अंदर की ओर पहनने की सलाह दी गई है।
नियमित रूप से गर्म पेय पदार्थ जैसे चाय, सूप या गुनगुना पानी पीते रहें। पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए विटामिन-सी युक्त फल और सब्जियों का सेवन करें। शीतलहर के समय यथासंभव घर के अंदर ही रहने का प्रयास करें।
बीमारियों के लक्षण दिखें तो तुरंत उपचार
शीतलहर के दौरान फ्लू, सर्दी, खांसी और जुकाम जैसी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
अल्प तापवस्था (हाइपोथर्मिया) के लक्षण जैसे शरीर का सामान्य से कम तापमान, लगातार कपकपी, याददाश्त कमजोर होना, बेहोशी, मूर्छा या बोलने में लड़खड़ाहट महसूस होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान
बुजुर्ग, नवजात शिशु और छोटे बच्चे शीतलहर से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इनके लिए टोपी, मफलर, मौजे और स्वेटर का नियमित उपयोग सुनिश्चित करें। आवश्यकता होने पर रूम हीटर का सीमित और सुरक्षित उपयोग किया जा सकता है।
त्वचा को नुकसान से बचाएं
अत्यधिक ठंड के लंबे समय तक संपर्क में रहने से त्वचा सुन्न और कठोर हो सकती है। हाथ-पैर की उंगलियों, नाक और कान में लाल फफोले पड़ने की संभावना रहती है। अत्यधिक ठंड से प्रभावित अंगों पर जोर से मालिश न करें, इससे नुकसान बढ़ सकता है।
नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान से लें सहायता
शीत ऋतु के दौरान किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जाकर चिकित्सक से उचित उपचार कराने की अपील स्वास्थ्य विभाग ने की है।
Author: Mahishmati Live











