
मंडला, मध्यप्रदेश से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां एक पीड़ित पत्नी अपने पति की संदिग्ध गुमशुदगी और संभवतः मौत की आशंका को लेकर न्याय के लिए दौड़भाग कर रही है।

महिला का पति, रामकुमार रजक, मंडला और जबलपुर क्षेत्र में मजदूरी कार्य करता था। 25 अगस्त को हुई आखिरी फोन कॉल के बाद से उनका कुछ भी पता नहीं चला। उसके बाद, दो व्यक्तियों ने उसी मोबाइल से कॉल कर यह दावा किया कि रामकुमार की लाश मदन महल स्टेशन के पास मिली है।
लेकिन जब पीड़िता ने मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर और सिवनी के थानों में रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की, तो किसी भी पुलिस स्टेशन ने FIR––यहां तक कि Zero FIR भी नहीं लिखी। न शव का कोई रिकॉर्ड मिला, न पोस्टमार्टम का कोई दस्तावेज।
महिला का गंभीर आरोप है कि रोजेंद्र उइके नामक एक व्यक्ति खुलेआम उसके पति की मौत और पोस्टमार्टम की बात बता रहा है। लेकिन पुलिस उससे पूछताछ करने की बजाय, पीड़िता को ही थानों के चक्कर कटवा रही है।
जनसुनवाई में महिला ने गृह मंत्री के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं—
संदिग्ध मौत की उच्च स्तरीय जांच, Zero FIR दर्ज करवाने का आदेश, उसके पति की वास्तविक खोजबीन, और संदिग्ध व्यक्तियों से तुरंत पूछताछ।
महिला मजदूरी करके अपने दो बच्चों का पेट पाल रही है। वह बताती है कि पिछले एक महीने से चार जिलों के चक्कर लगाने के बावजूद कहीं भी उसे न्याय की शुरुआत तक नहीं मिली।
अब वह उम्मीद कर रही है कि जनसुनवाई के बाद उसका मामला किसी निष्कर्ष तक पहुंचे और उसके पति की तलाश, सच्चाई के साथ आगे बढ़े।
Author: Mahishmati Live











