कलेक्टर की संवेदनशील पहल: घर तक पहुंचीं प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें
मंडला | 26 मार्च 2026

मध्यप्रदेश के मंडला जिले में प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां एक युवक की छोटी-सी समस्या को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने तुरंत समाधान सुनिश्चित किया। यह पहल न केवल प्रशासन की कार्यशैली को दर्शाती है, बल्कि युवाओं के सपनों को नई दिशा देने का भी काम कर रही है।
जनसुनवाई में उठी समस्या, तुरंत हुआ समाधान

अंजनिया तहसील के ग्राम मांद निवासी युवक अंकित श्रीवास ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक पुस्तकों की कमी की समस्या जनसुनवाई में रखी थी। युवक ने बताया कि संसाधनों के अभाव में उसकी तैयारी प्रभावित हो रही है। इस पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए।
मीडिया में चर्चा के बाद प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

बताया जा रहा है कि अंकित श्रीवास की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्होंने मीडिया के सामने भावुक होकर IAS बनने की इच्छा जताई थी। इस मामले को मीडिया ने हल्के-फुल्के अंदाज में उठाया, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और संवेदनशीलता का परिचय दिया।
शिक्षा और राजस्व विभाग की टीम पहुंची घर
कलेक्टर के निर्देशों के बाद गुरुवार को शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम युवक के घर पहुंची। टीम ने उसे प्रतियोगी परीक्षाओं की महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध कराईं, ताकि उसकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
इस टीम में तहसीलदार अंजनिया अजय श्रीवास्तव, सहायक संचालक शिक्षा विभाग एल.एस. मसराम और एपीसी मुकेश पांडेय शामिल रहे।
युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश
यह पहल दर्शाती है कि प्रशासन आम नागरिकों की समस्याओं के प्रति कितना सजग और जिम्मेदार है। साथ ही यह संदेश भी देती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और प्रशासन सहयोगी हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
संवेदनशील प्रशासन का मजबूत उदाहरण
मंडला जिले की यह घटना न केवल एक युवक की मदद की कहानी है, बल्कि यह एक ऐसे प्रशासनिक मॉडल को भी सामने लाती है, जो मानवीय मूल्यों और जिम्मेदारी के साथ कार्य करता है। इस तरह के प्रयास निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होते हैं।








