मंडला, 3 अप्रैल 2026 — मध्यप्रदेश के मंडला जिले में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त निर्णय लिया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सोमेश मिश्रा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पूरे जिले में निजी नलकूप (बोरवेल) खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। यह कदम गिरते जलस्तर और आगामी गर्मी के मौसम में संभावित जल संकट को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
गिरते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले के कई विकासखंडों — मंडला, बिछिया, मवई, घुघरी, नैनपुर, बीजाडांडी, नारायणगंज और निवास — में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो ग्रीष्मकाल में स्थिति गंभीर हो सकती है।
पूरे जिले को घोषित किया गया जल अभावग्रस्त
प्रशासन ने पूरे मंडला जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। इसके तहत कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं:
निजी एवं अशासकीय नलकूप खनन पर पूर्ण प्रतिबंध
बिना अनुमति किसी भी बोरिंग मशीन के जिले में प्रवेश पर रोक
नियमों का उल्लंघन करने पर मशीन जब्ती और एफआईआर
केवल आपात स्थिति में संबंधित अधिकारी की अनुमति से ही खनन संभव
सरकारी कार्यों को मिली छूट
यह प्रतिबंध शासकीय योजनाओं के अंतर्गत होने वाले नलकूप खनन पर लागू नहीं होगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा स्वीकृत सभी कार्य जारी रहेंगे। प्रशासन का उद्देश्य जरूरी सार्वजनिक जल आपूर्ति कार्यों को प्रभावित किए बिना निजी दोहन पर नियंत्रण करना है।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें:
एफआईआर दर्ज करना
मशीनों की जब्ती
जेल और जुर्माने का प्रावधान
जैसे कठोर कदम शामिल हैं।
15 जुलाई तक प्रभावी रहेगा आदेश
यह आदेश 1 अप्रैल से 15 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि को गर्मी के चरम समय को ध्यान में रखते हुए चुना गया है, जब जल संकट की संभावना सबसे अधिक रहती है।
हर साल लगती है रोक, लेकिन असर पर सवाल
हालांकि प्रशासन द्वारा यह प्रतिबंध हर वर्ष लगाया जाता है, लेकिन इसके बावजूद जिले में अवैध नलकूप खनन जारी रहता है। इस बार गिरते जलस्तर की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन से सख्ती और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
जल संरक्षण की दिशा में जरूरी कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रतिबंध ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और जागरूकता अभियान भी जरूरी हैं। यदि इन उपायों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए, तभी लंबे समय तक जल संकट से राहत मिल सकती है।








