चैत्र तक सीमित परिक्रमा अब पूरे साल का संकल्प
उत्तरवाहिनी प्रवाह का हजारों वर्ष पुराना इतिहास

मंडला में आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
मंडला, 13 दिसंबर (महिष्मति लाइव)


महिष्मति नगरी मंडला में माँ नर्मदा की उत्तरवाहिनी परिक्रमा अब वर्ष भर होगी। माँ रेवा सेवा समिति, रंगरेज घाट के सदस्यों ने इस पवित्र यात्रा के लिए संकल्प लिया है। चैत्र माह तक सीमित यह परिक्रमा अब मंडला शहरवासियों को वर्ष भर करने का संदेश दे रही है।महिष्मति की महिमा माँ नर्मदा से ही है। प्राचीन काल में नर्मदा जी दुप्टा संगम से सीधे नारायणगंज बहती थीं। भगवान वेदव्यास की कृपा से मैया ने मार्ग बदलकर मंडला में मंडलाकार रचना की और उत्तरवाहिनी प्रवाह का आशीर्वाद दिया। यह प्रवाह हजारों वर्ष पुराना है।कुछ वर्ष पूर्व पूज्य संतों ने स्थानीयजनों को इसकी जानकारी दी, तब से चैत्र में परिक्रमा शुरू हुई। इस वर्ष मंडला के श्रद्धालुओं ने दिव्यता आत्मसात करने के उद्देश्य से पहले ही यात्रा शुरू कर दी।

13 दिसंबर को 25 भक्तों का समूह रवाना

सुबह 7 बजे शहर के 25 भक्त श्री व्यास नारायण मंदिर, किला घाट पहुँचे। उत्तरवाहिनी परिक्रमा आयोजन समिति के सुधीर कांसकार ने रूट चार्ट समझाया। पंडित रामायण दुबे ने संकल्प पूजन करवाकर समूह को तट परिवर्तन के लिए रवाना किया।पिछले 4-5 वर्षों में चैत्र के अलावा यह पहला समूह है। भक्तों से चर्चा में पता चला कि यदि यह परंपरा बनी, तो वर्ष भर श्रद्धालुओं का मंडला आगमन बढ़ेगा। मंडला अब आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभरेगा।
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Author: Mahishmati Live











