शतायु मातृशक्ति का सम्मान, 113 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय फगिनी बाई
मंडला | झिगराघाट (अंजनिया)
कुर्मी समाज की सबसे वयोवृद्ध माताओं में शामिल 113 वर्षीय फगिनी बाई पटेल का हाल-चाल जानने के लिए कुर्मी समाज विकास संगठन, जिला मंडला का एक प्रतिनिधिमंडल उनके निवास झिगराघाट पहुंचा। इस दौरान समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने माताजी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
राजाराम पटेल के नेतृत्व में पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

यह प्रतिनिधिमंडल समाज के वरिष्ठ सदस्य राजाराम पटेल (ककैया) के नेतृत्व में पहुंचा। इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष सी.बी. पटेल, राम भजन पटेल, निर्मल पटेल, एडवोकेट निखिल पटेल सहित समाज के अन्य सदस्य एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
113 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय और जागरूक
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि इतनी अधिक उम्र होने के बावजूद फगिनी बाई पटेल पूरी तरह सजग हैं। वे लोगों के अभिवादन को समझती हैं और “राधे-राधे” व “राम-राम” कहकर अतिथियों का स्वागत करती हैं। यह उनकी मानसिक और भावनात्मक सुदृढ़ता का प्रमाण है।
संयुक्त परिवार में मिल रहा भरपूर स्नेह और देखभाल

परिवारजनों के अनुसार, फगिनी बाई पटेल पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने बड़े परिवार के बीच एक मजबूत आधार स्तंभ के रूप में मौजूद हैं। उनके नाती-पोते और परपोते-परपोतियां उनका विशेष ध्यान रखते हैं।
उनके आहार, व्यवहार और दैनिक जीवन की सभी आवश्यकताओं का सम्मानपूर्वक ध्यान रखा जाता है, जो आज के समय में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
संयुक्त परिवार का आदर्श उदाहरण बना परिवार
आज के दौर में जहां समाज तेजी से एकल परिवार की ओर बढ़ रहा है, वहीं फगिनी बाई पटेल का परिवार संयुक्त रूप में रहकर एक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। यह परिवार समाज को बुजुर्गों के सम्मान और सेवा का संदेश दे रहा है।
शाल-श्रीफल से किया सम्मान, लिया आशीर्वाद
प्रतिनिधिमंडल ने फगिनी बाई पटेल का शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मान किया तथा समाज की उन्नति और समृद्धि के लिए उनका आशीर्वाद लिया।
परिवार में कई पीढ़ियों का स्नेह
वर्तमान में परिवार में उनके नाती सुनील पटेल (डिप्टी रेंजर, मोहगांव प्रोजेक्ट), सुभाष पटेल, रंजना पटेल, अंजना पटेल सहित परपोते सुलभ और परपोतियां साक्षी, शिक्षा और सोनाक्षी उनकी सेवा में समर्पित हैं।
बुजुर्गों की सेवा समाज के लिए प्रेरणा
यह पूरा घटनाक्रम समाज को यह संदेश देता है कि बुजुर्ग ही परिवार और समाज की नींव होते हैं। उनका सम्मान और सेवा करना न केवल कर्तव्य है, बल्कि गर्व की बात भी है।








