कान्हा टाइगर रिजर्व में फिर बाघ शावक की मौत, बढ़ता खतरा: एक के बाद एक मौतें

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लगातार मौतों के बीच अब बाघों की हेल्थ जांच शुरू, संक्रमण की आशंका बढ़ी

मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। सरही परिक्षेत्र के उमरपानी क्षेत्र में एक मादा बाघ शावक की मौत ने वन विभाग को अलर्ट मोड में ला दिया है।

घटना के बाद तत्काल क्षेत्र को सुरक्षित कर हाथियों की मदद से सघन तलाशी अभियान चलाया गया। मृत शावक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जहां विशेषज्ञों द्वारा मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सैंपल लिए गए हैं।

मौत के बाद अन्य बाघों की स्वास्थ्य जांच शुरू

लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए उसी क्षेत्र में मौजूद एक मादा बाघ और उसके शावक की पहचान की, जिनकी स्वास्थ्य स्थिति संदिग्ध पाई गई।

उच्च अधिकारियों की निगरानी में दोनों का निश्चेतन कर सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। इसके बाद उनके स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जरूरी सैंपल—जैसे रक्त, स्वैब और स्लाइड—लिए गए।

क्वारंटाइन सेंटर में निगरानी, बीमारी की आशंका

रेस्क्यू के बाद मादा बाघ और शावक को सरही परिक्षेत्र से मुक्की क्षेत्र के क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया है, जहां उनकी लगातार निगरानी और इलाज किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही मौतों के बीच यह जांच बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संभावित संक्रमण या बीमारी का पता चल सकता है।

एक साल में 10 बाघों की मौत, बढ़े सवाल

कान्हा टाइगर रिजर्व में पिछले एक साल के भीतर करीब 10 बाघों की मौत हो चुकी है। हाल ही में एक बाघिन और उसके तीन शावकों की मौत ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या ये मौतें प्राकृतिक कारणों से हो रही हैं या इसके पीछे कोई बड़ी लापरवाही या अन्य कारण छिपे हैं।

वन्यजीव संरक्षण पर उठ रहे गंभीर सवाल

जिस कान्हा टाइगर रिजर्व को बाघों के लिए सबसे सुरक्षित आवास माना जाता है, वहीं लगातार सामने आ रही घटनाएं वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बाघों की सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

अब सख्त कदम उठाने की जरूरत

कान्हा टाइगर रिजर्व की ताजा घटनाएं यह संकेत देती हैं कि केवल जांच और कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर मजबूत रणनीति और निगरानी की आवश्यकता है।

बाघों की सुरक्षा केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि देश की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में हर स्तर पर गंभीरता से कदम उठाना जरूरी हो गया है।

Mahishmati Live
Author: Mahishmati Live

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