नारायणगंज में सट्टा नेटवर्क का विस्तार, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
गली-मोहल्लों तक पहुंचा सट्टा कारोबार

नारायणगंज नगर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध सट्टा कारोबार तेजी से फैलता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, सट्टा माफिया ने पहले ही नगर में अपनी मजबूत पकड़ बना ली थी और अब यह नेटवर्क आसपास के गांवों तक फैल चुका है। गली-मोहल्लों में खुलेआम सट्टा पट्टी लिखे जाने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे स्थानीय लोग परेशान हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सट्टा कारोबार खुलेआम चल रहा है, लेकिन पुलिस प्रशासन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। लोगों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि किसी बड़े संरक्षण की ओर इशारा करता है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस अवैध कारोबार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
युवाओं की बढ़ती भागीदारी, संगठित रैकेट की आशंका
सट्टा अड्डों पर युवाओं की बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत देती है कि यह कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा है। दिन-रात चल रही गतिविधियों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
एजेंटों के जरिए फैल रहा नेटवर्क
सूत्रों के मुताबिक, सट्टा संचालकों ने नगर में अलग-अलग एजेंट तैनात कर रखे हैं, जो गांव-गांव जाकर नंबर बुक करते हैं। कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब यह नेटवर्क मोबाइल फोन के जरिए भी संचालित हो रहा है, जिससे इसका विस्तार और तेज हो गया है।
मोबाइल के जरिए सट्टा, लेन-देन भी डिजिटल
जानकारी के अनुसार, सट्टा खेलने वाले लोग अब फोन के जरिए नंबर बता रहे हैं। अगर नंबर खुलता है, तो एजेंटों के माध्यम से रकम का लेन-देन किया जाता है। यह पूरा खेल 0 से 9 नंबर के बीच चलता है, जिसमें एक नंबर खुलता है और सही अनुमान लगाने वाले को 1 रुपये के बदले 80 रुपये तक मिलते हैं।
पुलिस कार्रवाई पर सवाल, कब जागेगा प्रशासन?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि टिकरिया पुलिस प्रशासन इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा। लगातार बढ़ते इस अवैध कारोबार ने आम जनता में आक्रोश पैदा कर दिया है। नगरवासी अब जवाब मांग रहे हैं कि आखिर कब इस पर रोक लगेगी और कब प्रशासन सख्त कदम उठाएगा।
नारायणगंज में फैलता सट्टा कारोबार न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनता जा रहा है, बल्कि युवाओं के भविष्य पर भी खतरा पैदा कर रहा है। ऐसे में प्रशासन की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। अब देखना होगा कि क्या संबंधित विभाग इस पर कार्रवाई करता है या यह अवैध नेटवर्क यूं ही चलता रहेगा।








