सह-आरोपी कपिल साहू भी पुलिस के हत्थे चढ़ा, फरारी के नेटवर्क पर उठे सवाल
मंडला/जबलपुर। व्यापारी पर कथित जानलेवा हमले के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे सैंडी बरमैया को आखिरकार बरेला पुलिस ने भोपाल से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके साथ कथित सह-आरोपी कपिल साहू को भी गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को भोपाल क्षेत्र से गिरफ्तार कर जबलपुर लाया गया।
सैंडी बरमैया की गिरफ्तारी के बाद अब इस पूरे मामले में सिर्फ हमले की घटना ही नहीं, बल्कि आरोपी की लंबी फरारी, उसे कथित तौर पर मिली मदद और मंडला जिले में उसके रेत कारोबार से जुड़े आरोपों की भी चर्चा तेज हो गई है।

व्यापारी शंकर गुरनानी पर हमले का मामला
बरेला पुलिस के अनुसार व्यापारी शंकर गुरनानी पर हुए कथित जानलेवा हमले के मामले में सैंडी बरमैया लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार हमले में व्यापारी के सिर पर गंभीर चोटें आई थीं और उन्हें कई टांके लगाए गए थे।
घटना के बाद बरेला पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की थी। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के लिए कई स्थानों पर लगातार दबिश दी गई।
दिल्ली से उत्तराखंड और रायपुर तक दबिश
आरोपियों की तलाश में बरेला पुलिस ने दिल्ली, उत्तराखंड, रायपुर और मंडला सहित कई स्थानों पर दबिश दी। लंबे समय तक पुलिस को चकमा देने के बाद आखिरकार मुखबिर तंत्र और तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों की लोकेशन भोपाल क्षेत्र में मिली।
इसके बाद पुलिस टीम ने रात के समय कार्रवाई करते हुए सैंडी बरमैया और कपिल साहू को गिरफ्तार कर लिया।
बताया जा रहा है कि आरोपियों पर हजारों रुपये का इनाम भी घोषित था। हालांकि, इनाम की सटीक राशि और अन्य कार्रवाई संबंधी आधिकारिक जानकारी पुलिस रिकॉर्ड से स्पष्ट होना बाकी है।
गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल—इतने लंबे समय तक फरारी कैसे?
सैंडी बरमैया की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उसकी लंबी फरारी को लेकर है।
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होने के बावजूद आरोपी लंबे समय तक पुलिस की पहुंच से बाहर कैसे रहा? फरारी के दौरान वह कहां-कहां रहा? उसे आर्थिक, लॉजिस्टिक या अन्य किसी प्रकार की मदद किसने उपलब्ध कराई?
इन सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आना बेहद महत्वपूर्ण है।
पुलिस की भूमिका पर भी उठते रहे सवाल
शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया जाता रहा है कि फरारी के दौरान सैंडी बरमैया को मंडला जिले के एक थाने से कथित तौर पर मुचलका भी दिया गया था।
शिकायतकर्ता का दावा है कि अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जवाब-तलब की स्थिति बनी।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। यदि जांच में ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल भी गंभीर होगा कि एक गंभीर मामले में फरार आरोपी को स्थानीय स्तर पर कथित राहत कैसे मिली।
राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की भी जांच जरूरी
सैंडी बरमैया को लेकर मंडला में लंबे समय से राजनीतिक संरक्षण के आरोप और चर्चाएं सामने आती रही हैं। आरोप यह भी लगाए जाते रहे हैं कि कुछ प्रभावशाली लोगों की मदद से आरोपी पुलिस की कार्रवाई से बचता रहा।
इन आरोपों की भी निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच जरूरी है।
क्योंकि अगर किसी फरार आरोपी को वास्तव में राजनीतिक या प्रभावशाली लोगों का संरक्षण मिला था, तो केवल गिरफ्तारी से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि फरारी के दौरान आरोपी का नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था और उसे संरक्षण या मदद किस स्तर पर मिली।
गिरफ्तारी के साथ रेत कारोबार भी जांच के घेरे में
सैंडी बरमैया की गिरफ्तारी के बाद अब मंडला जिले में उसके कथित रेत कारोबार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
बम्हनी क्षेत्र में सैंडी बरमैया का रेत कारोबार में दबदबा होने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। आरोप है कि उसके पास बड़ी संख्या में डंपर और छोटे-बड़े वाहन हैं, जिनके जरिए रेत का परिवहन अलग-अलग शहरों और जिलों तक किया जाता है।
हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
‘वाइट हाउस’ के कथित रेत स्टॉक की जांच की मांग
बम्हनी क्षेत्र के पास ‘वाइट हाउस’ के नाम से पहचाने जाने वाले स्थान पर बड़ी मात्रा में रेत के कथित अवैध स्टॉक को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वहां वास्तव में बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण किया गया था, तो यह किसकी अनुमति से हुआ?
रेत कहां से लाई गई? किसके नाम पर स्टॉक था? उसके पास वैध दस्तावेज थे या नहीं? रॉयल्टी जमा की गई थी या नहीं? परिवहन के लिए वैध ई-रवन्ना जारी हुए थे या नहीं?
इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।
डंपरों की ‘फौज’ और दस्तावेजों की हो जांच
यदि रेत कारोबार से जुड़े आरोपों की जांच होती है, तो सिर्फ मौके पर मौजूद रेत की जांच पर्याप्त नहीं होगी।
रेत परिवहन में लगे सभी डंपरों और अन्य वाहनों का रिकॉर्ड खंगालना होगा। वाहनों का स्वामित्व, परमिट, ई-रवन्ना, रॉयल्टी भुगतान, जीपीएस रिकॉर्ड और पिछले कई महीनों में हुए परिवहन की जानकारी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।
इससे यह पता लगाया जा सकता है कि वास्तव में कितना रेत परिवहन हुआ और उसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
चार विभागों की संयुक्त जांच की जरूरत
मामले की गंभीरता को देखते हुए खनिज, परिवहन, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच की मांग उठ रही है।
जांच में यह देखा जाना चाहिए कि—
– रेत के कथित स्टॉक की अनुमति थी या नहीं।
– स्टॉक की मात्रा और रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा में कोई अंतर है या नहीं।
– रेत के परिवहन के लिए वैध ई-रवन्ना जारी हुए या नहीं।
– रॉयल्टी का भुगतान किया गया या नहीं।
– परिवहन में लगे वाहनों के दस्तावेज वैध हैं या नहीं।
– जीपीएस रिकॉर्ड और वास्तविक परिवहन में कोई गड़बड़ी तो नहीं।
– संबंधित स्थान पर अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया गया या नहीं।
अगर जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित लोगों के साथ-साथ निगरानी में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
अब पुलिस के सामने सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पूरे नेटवर्क की पड़ताल की चुनौती
सैंडी बरमैया की गिरफ्तारी निश्चित रूप से पुलिस के लिए एक बड़ी कार्रवाई है, लेकिन इस मामले की असली जांच अब शुरू होती दिखाई दे रही है।
पुलिस को यह पता लगाना होगा कि आरोपी इतने लंबे समय तक कहां रहा, किन लोगों के संपर्क में था और उसकी फरारी के दौरान उसे किस स्तर पर मदद मिली।
इसके साथ ही उसके कथित रेत कारोबार से जुड़े नेटवर्क, वाहनों, आर्थिक लेन-देन और अन्य संपत्तियों की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
गिरफ्तारी से कई सवालों के जवाब मिलेंगे या नए सवाल खड़े होंगे?
फिलहाल सैंडी बरमैया और कपिल साहू पुलिस की गिरफ्त में हैं। अब दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन इस गिरफ्तारी के साथ मंडला जिले में रेत कारोबार, राजनीतिक हस्तक्षेप, कथित संरक्षण और प्रशासनिक निगरानी को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवाल एक बार फिर चर्चा में हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस और संबंधित विभाग इस मामले को सिर्फ व्यापारी पर कथित हमले तक सीमित रखते हैं या फिर आरोपी की फरारी से लेकर उसके कथित रेत कारोबार और पूरे नेटवर्क की भी गहराई से जांच करते हैं।










