नियमितीकरण, वेतन विसंगति और सामाजिक सुरक्षा को लेकर उठी आवाज़
🔹 सरकार के समक्ष रखी गई कर्मचारियों की लंबित मांगें

मंडला। प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों ने अपनी वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर सरकार के समक्ष एक विस्तृत मांग पत्र प्रस्तुत किया है। इस मांग पत्र में संविदा, आउटसोर्स, अंशकालीन, कार्यभारित और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से जुड़े 15 प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है।

🔹 चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर भर्ती की मांग
कर्मचारियों ने चतुर्थ श्रेणी के लंबे समय से रिक्त पड़े पदों पर शीघ्र भर्ती की मांग की है। उनका कहना है कि कर्मचारियों की कमी के कारण मौजूदा स्टाफ पर अत्यधिक कार्यभार है।
🔹 ग्रुप ‘D’ का पदनाम बदलने का मुद्दा फिर उठा
लगभग 15 वर्षों से लंबित ग्रुप ‘D’ का पदनाम बदलकर कार्यालय सहायक करने की मांग को एक बार फिर सरकार के सामने रखा गया है, जिस पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
🔹 आकस्मिक और कार्यभारित कर्मचारियों के अधिकार
प्रदेश में कार्यरत आकस्मिक और कार्यभारित कर्मचारियों को नियमित पदों पर समायोजित करने, 300 दिन के अवकाश नगदीकरण और पदोन्नति का लाभ देने की मांग की गई है।
🔹 7वें वेतनमान में समानता की मांग
स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को 7वें वेतनमान का लाभ अलग-अलग तिथियों से दिए जाने पर आपत्ति जताई गई है। मांग है कि सभी कर्मचारियों को 01 जनवरी 2016 से समान रूप से 7वां वेतनमान दिया जाए।
🔹 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की वेतन विसंगति
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के ग्रेड-पे को 1300 से बढ़ाकर 1800 करने और सहायक ग्रेड-3 पद पर पदोन्नति के स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग भी शामिल है।
🔹 वर्दी धुलाई और अन्य भत्तों पर सवाल
वर्ष 2009 से दिए जा रहे 50 रुपये वर्दी धुलाई भत्ते को वर्तमान महंगाई के अनुरूप बढ़ाने की मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि यह राशि आज के समय में बेहद अपर्याप्त है।
🔹 अंशकालीन कर्मचारियों के स्थायीकरण की मांग
प्रदेश में कार्यरत लगभग 20 हजार अंशकालीन कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने या कलेक्टर दर घोषित करने की मांग की गई है।
🔹 आउटसोर्स व्यवस्था समाप्त करने की मांग
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए अलग आयोग के गठन, ठेका प्रथा समाप्त करने और विभागवार वरिष्ठता सूची जारी कर नियमित सेवा का अवसर देने की बात कही गई है।
🔹 आंगनवाड़ी, आशा और रसोइयों को नियमित वेतन की मांग
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, आशा कार्यकर्ता, मिड-डे मील रसोइया और ग्राम रक्षकों को सरकारी कर्मचारी घोषित कर नियमित वेतन और सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की गई है।
🔹 कर्मचारियों का कहना – योजनाओं का बोझ, अधिकार शून्य
कर्मचारियों का कहना है कि वे सरकार की योजनाओं को ज़मीन पर लागू करने की अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो सम्मानजनक वेतन मिल रहा है और न ही भविष्य की सुरक्षा।
🔹 सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस 15 सूत्रीय मांग पत्र पर क्या निर्णय लेती है और क्या इन कर्मचारियों को लंबे संघर्ष के बाद कोई ठोस राहत मिल पाती है या नहीं।
Author: Mahishmati Live











