मंडला। जिला मुख्यालय के समीप ग्राम पंचायत देवदरा अंतर्गत राजीव कॉलोनी, झंडा चौक में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति की महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

कंस वध प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु
प्रसिद्ध कथावाचक पंडित कुलदीप महाराज ने कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अधर्म के प्रतीक कंस के वध का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि अत्याचारी कंस के अत्याचारों से पूरी प्रजा त्रस्त थी। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने मथुरा पहुंचकर कंस के पहलवानों चाणूर और मुष्टिक का संहार किया तथा अंततः कंस का वध कर धर्म की स्थापना की।
महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है कि सत्य और धर्म की विजय निश्चित होती है। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान के जयकारे लगाते रहे।

द्वारिका नगरी की स्थापना और द्वारकाधीश स्वरूप का वर्णन
कथा को आगे बढ़ाते हुए पंडित कुलदीप महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा से द्वारिका प्रस्थान का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जरासंध के लगातार आक्रमणों से प्रजा की रक्षा के लिए भगवान ने समुद्र के मध्य भव्य और सुरक्षित द्वारिका नगरी बसाई।
उन्होंने कहा कि द्वारिका के राजा बनने के बाद भगवान श्रीकृष्ण को द्वारकाधीश के नाम से जाना गया। उनका यह स्वरूप न्याय, दया और प्रजावत्सलता का प्रतीक माना जाता है।

धूमधाम से संपन्न हुआ श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह महोत्सव
कथा का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह का प्रसंग रहा। पंडित कुलदीप महाराज ने रुक्मणी हरण और विवाह की कथा सुनाते हुए बताया कि रुक्मणी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना जीवनसाथी मान लिया था और उनकी प्रार्थना पर भगवान स्वयं उन्हें लेने पहुंचे।
कथा पंडाल में श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह की मनमोहक सजीव झांकी प्रस्तुत की गई। बैंड-बाजों, आतिशबाजी और पारंपरिक उत्सव के साथ बारात निकाली गई। वरमाला कार्यक्रम के दौरान पूरा परिसर तालियों, मंगल गीतों और जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने अक्षत वर्षा कर नवदंपति स्वरूपों का स्वागत किया।

भगवान को प्रसाद अर्पित करने का बताया आध्यात्मिक महत्व
कथा के दौरान पंडित कुलदीप महाराज ने भगवान को प्रसाद अर्पित करने के आध्यात्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और समर्पण भाव से अर्पित किया गया प्रसाद भक्त और भगवान के बीच प्रेम का माध्यम बनता है तथा इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
भजनों और दिव्य झांकियों पर झूमे श्रद्धालु
कथा स्थल पर प्रस्तुत किए गए मधुर भजनों और आकर्षक झांकियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा वातावरण भक्तिरस में डूबा नजर आया। श्रद्धालु देर तक भजनों पर झूमते रहे और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
आयोजन को सफल बनाने में समिति और क्षेत्रवासियों का योगदान
इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति की महिला मंडल, स्थानीय युवा समितियों, प्रबुद्ध नागरिकों एवं क्षेत्रवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजकों ने बताया कि कथा के आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मंडला के देवदरा स्थित राजीव कॉलोनी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कंस वध, द्वारकाधीश प्रसंग और दिव्य झांकियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।









