श्रावण सोमवार पर माहिष्मती घाट से निकली जल कलश यात्रा, व्यास नारायण मंदिर में हुआ रुद्राभिषेक

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नर्मदा जल से भगवान शिव का हुआ जलाभिषेक

श्रावण मास के पावन सोमवार पर नर्मदा नगरी मंडला भक्ति और आस्था से सराबोर नजर आई। उत्तर वाहिनी परिक्रमा समिति के सदस्यों और नगर के श्रद्धालुओं ने माहिष्मती घाट से पवित्र नर्मदा जल भरकर जल कलश यात्रा निकाली। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए व्यास नारायण मंदिर पहुंची, जहां विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक किया गया।

हर-हर नर्मदे और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से गूंजा शहर

जल कलश यात्रा में बाल, युवा, महिला और बुजुर्ग सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्त हाथों में कलश लेकर पैदल व्यास नारायण मंदिर पहुंचे। इस दौरान “हर हर नर्मदे” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

श्रावण में शिव आराधना का विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस महीने भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्रार्चन विशेष फलदायी माना जाता है। नर्मदा को जीवनदायिनी नदी के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है और धार्मिक मान्यता है कि नर्मदा जल शिव स्वरूप है। इसी आस्था के साथ श्रद्धालुओं ने नर्मदा जल से भगवान का अभिषेक किया।

नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

पूजा-अर्चना के बाद उत्तर वाहिनी परिक्रमा समिति की ओर से श्रद्धालुओं के बीच प्रसादी का वितरण किया गया। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और मां नर्मदा के प्रति आस्था से जोड़ना है।

भक्तिमय रहा माहौल

पूरे आयोजन के दौरान माहिष्मती घाट से लेकर व्यास नारायण मंदिर तक श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने जल कलश यात्रा को भव्य रूप दिया। श्रावण सोमवार पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन में नर्मदा भक्ति और शिव आराधना का सुंदर संगम देखने को मिला।

Mahishmati Live
Author: Mahishmati Live

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