एक सप्ताह पूरा, अब उग्र आंदोलन और पोल खोल अभियान की चेतावनी
कान्हा प्रबंधन पर लगातार बढ़ रहा दबाव

कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही असमय मौतों, वन्यजीव सुरक्षा में कथित लापरवाही और प्रबंधन की कार्यप्रणाली के विरोध में जिलेभर के पत्रकारों द्वारा किया जा रहा धरना प्रदर्शन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन को आज एक सप्ताह पूरा हो गया, लेकिन अब तक कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आने पर पत्रकारों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
पत्रकारों का आरोप है कि लगातार बाघों की मौत होने के बावजूद प्रबंधन ने न तो पारदर्शिता दिखाई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई की। इसी मुद्दे को लेकर जिले के पत्रकार 14 सूत्रीय मांगों के साथ लामबंद होकर आंदोलन कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री के नाम आज सौंपा जाएगा ज्ञापन
केंद्र सरकार तक पहुंचाई जाएगी आवाज

धरना स्थल पर मौजूद पत्रकारों ने निर्णय लिया है कि आज देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौतों की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, वन्यजीव सुरक्षा की स्वतंत्र मॉनिटरिंग और पत्रकारों की मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की जाएगी।
पत्रकारों का कहना है कि यदि स्थानीय और राज्य स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो अब वे सीधे केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे।
मंगलवार को होगा सुंदरकांड का आयोजन
आंदोलन को दिया जा रहा सांस्कृतिक और जनसमर्थन का स्वरूप

आंदोलनकारी पत्रकारों ने मंगलवार को धरना स्थल पर सुंदरकांड पाठ के आयोजन की घोषणा की है। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रार्थना का प्रतीक होगा।
सुंदरकांड के माध्यम से आंदोलन को सामाजिक और सांस्कृतिक समर्थन देने की तैयारी भी की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
इसके बाद उग्र आंदोलन की चेतावनी
पत्रकारों ने कहा — अब चुप नहीं बैठेंगे

धरना प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन, प्रशासनिक घेराव और जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। साथ ही पत्रकार “पोल खोल अभियान” भी शुरू करेंगे, जिसमें कथित अनियमितताओं, लापरवाही और वन्यजीव प्रबंधन की वास्तविक स्थिति को जनता के सामने लाया जाएगा।
बाघों की मौत बना बड़ा सवाल
वन्यजीव सुरक्षा पर उठ रहे गंभीर प्रश्न
पिछले एक माह के दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व में सामने आए बाघों की मौत के मामलों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। वन्यजीव प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और पत्रकारों का कहना है कि लगातार हो रही घटनाएं जंगल प्रबंधन की गंभीर कमजोरियों की ओर संकेत कर रही हैं।
आरोप है कि कई मामलों में मौत के कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे संदेह और असंतोष लगातार बढ़ता गया।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह स्थिति जंगल और वन्यजीव संरक्षण दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
14 सूत्रीय मांगों को लेकर एकजुट हुए पत्रकार

पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
धरने पर बैठे पत्रकारों ने अपनी 14 सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से शामिल किया है —
बाघों की मौत की निष्पक्ष जांच
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना
सूचना में पारदर्शिता
मीडिया को तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराना
संरक्षण कार्यों की स्वतंत्र मॉनिटरिंग
स्थानीय लोगों और पत्रकारों की भागीदारी सुनिश्चित करना
पत्रकारों का कहना है कि यह आंदोलन केवल मीडिया का नहीं बल्कि जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण बचाने की लड़ाई है।
आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
सामाजिक, राजनीतिक और व्यापारिक संगठनों का साथ

धरना प्रदर्शन को जिले के विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक, राजनीतिक और प्रशासनिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है। कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी आंदोलन स्थल पहुंचकर पत्रकारों के समर्थन में आवाज उठा चुके हैं।
समर्थन देने वाले संगठनों का कहना है कि जंगल और वन्यजीव किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज की धरोहर हैं।
पत्रकारों का ऐलान
“सच्चाई सामने लाकर रहेंगे”

धरना स्थल से पत्रकारों ने साफ कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता।
पत्रकारों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन यदि प्रशासन और प्रबंधन ने अब भी अनदेखी की, तो आंदोलन आने वाले दिनों में प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है।








